आये थे जब वो जिंदगी में हर मौसम रंगीन था
इश्क़ करना उनसे शायद, मेरा जुर्म संगीन था
क़त्ल किया उसने ऐसे की आह्ह भी ना कर सके
कुछ हम नशे में थे कुछ कातिल हसींन था
इश्क़ करना उनसे शायद, मेरा जुर्म संगीन था
क़त्ल किया उसने ऐसे की आह्ह भी ना कर सके
कुछ हम नशे में थे कुछ कातिल हसींन था
No comments:
Post a Comment